RUHANI ILAJ

 नक्श तरक्की कारोबार

 ( व्यापार उन्नति दायक यंत्र )

 बहुत से भाई बहन अपने कारोबार की तरफ से बहुत परेशान रहते है अच्छी तरह से समझदारी और सूझबूझ के साथ  कारोबार करने पर भी कामयाबी नहीं मिलती ऐसे भाई बहन के लिये यह नयाब रूहानी  तोहफा है । बहुतो ने आजमाया है इस तावीज को शीशे के फ्रेम में जड़वा कर दुकान , फैक्ट्री , व्यापार कारोबार की जगह पर लगाने से हर कारोबार की रुकावट बा हुक्मे खुदा दूर होकर उसमें तरक्की होने लगती है ।             

  इस तावीज में अलग अलग  39 ( उनतालीस ) और कुल मिलाकर 45 ( पैंतालीस ) नक्श है जिन्हे इस्तेखारा करने के बाद रूहानी तरीके से उनको उनके मुकाम पर शामिल किया गया है क्योकि ये नक्श बड़ा है इसलिये बार बार दस्ती लिखने से गलती होने का डर रहता है इसलिये इस नक्श को जाफरान की स्याही से बहुत पाकीजगी के साथ प्यार दिया जाता है । तावीज नक्श तरक्की कारोबार जिस पर खूबसूरत बार्डर दूसरे रंग में डलवाया गया है और ऊपर से लमीनेशन भी कराया गया है ।

   इसके अलावा तलबगार को तावीज भेजने से पहले इस पर ग्यारह दिन तक नीचे लिखा अमल पढ़ कर रूहानी ताकत से पुर किया जाता है अल्लाह के करम से अभी तक तुजर्बो में नाकाम नहीं रहा है ….

 

  मुहब्बत के लिये

कई बार मियां बीवी में अनबन हो जाती है बीवी मायके चली जाती है फिर या तो शौहर बीवी को उसके मायके से लाना नहीं  चाहता और कई बार खुद बीवी भी अपने मायके जाकर बैठ जाती है , वापस आने का नाम ही नहीं लेती । ऐसी हालत कई बार दोनों घरों में तनाजे का सबब बन जाती है । अगर किसी के साथ ऐसे हालात पैदा हो रहे हो तो उनके लिए यहाँ दिया गया अमल रहमत का परवाना । अल्लाह के करम से सख्त से सख्त दिल भी नफरत छोड़ कर मोम की तरह नरम हो जाता है और उसके दिल में मुहब्बत का समुन्दर जोश मारने लगता है बहुत से अफराद को बताया कभी नाकाम नहीं हुआ ।

     अमल ये है – किसी भी माकूल और साअत से इस अमल को शुरू करें । मसलन मश्तूरी की साअत में शुरू करें ।

हर दिन वक्त मुकर्रर पर इस अमल को पढें । किसी तन्हा जगह किब्ले रुख बैठ कर पहले उस जगह मतलूब के नाम की बखुरात बना कर उस जगह को बखुरात कि धुँए से मुअत्तर कर दे, फिर अगरबत्ती सुलगा कर अपने करीब लगा लें ।  इसके बाद ग्यारह (11 ) बार दुरुद शरीफ पढ़े , इसके बाद यहाँ दिया गया अमल तीन सौ साठ (360 ) बार  पढ़े, इसके बाद फिर ग्यारह (11 )  बार दुरुद शरीफ पढ़े । इसके बाद खामोशी से सो जायें । हर दिन इसी तरह करें, अल्लाह के करम से कामयाबी मिलेगी……

जरुरी हिदायत –  इस अमल को हर दिन वक्त मुकर्रर पर पढ़े । फुलां बिन में पहले कि जगह मतलूब का नाम और दूसरी जगह उसकी माँ का नाम अगर मतलूब औरत है तो बिन कि जगह बिन्त कहें ना जायज के लिए इस अमल को हरगिज न करें वरना नुकसान उठाना पड़ेगा …

 

मुहब्बत के लिये दूसारा अमल  

अमल  मुझे एक दूर्वेश न बताया है । उनका कहना है कि उन्होंने बहुत से लोगो को बताया है,बहुत की कार आमाद अमल है । अगर किसी के दिल में महुब्बत पैदा करनी हो तो ये अमल बहुत ही तासीर वाला है ।  इस अमल को करने से पहले बांस की कमान और दो सौ अस्सी तीर बनायें । तीर सीधी सलाई की तरह बनायें  उनकी नोंक यों ही घिस कर बना दे , उनमे कोई लोहा पत्थर न लगाये। जब आप ये सब कर चुके तोह ये अमल हफ्ते की रात से शुरू किया जायेगा । जब जुमे का दिन निकल जायें तो हफ्ते की रात आती है । इस रात को आधी रात के करीब कमान और सात तीर लेकर किसी दरिया के किनारे चले जायें । अब एक तीर लेकर तीन ( 3 ) बार दुरुद शरीफ , चालीस ( 40 ) बार आगे दिया हुआ अमल, फिर ग्यारह (11 ) बार दुरुद शरीफ पढ़े, तीर पर दम करें, बिस्मिल्लाह  शरीफ, पढ़ कर तीर कमान पर रखें और दरिया की तरफ चला दे ।  इसी तरह से पढ़ – पढ़ कर सभी सातों तीर चला दे और फिर घर लौठ आये । रास्ते में अगर कोई मिल जायें तो अहतयात के साथ उससे बचकर निकल जायें, अगर बच कर ना निकला जा सके तो कुछ रास्ते से कुछ इस तरह से हट जायें कि उसकी नज़र आप पर न पड़े । इसी तरह हर रत बिना नागा कमान और सात तीर लेकर दरिया पर जायें और यही अमल करें और चालीस दिन तक करें । चालीस दिन में तमाम तीर पूरे हो जायेंगे अल्लाह के करम से पूरी और कामयाबी मिलेगी …

  जरुरी हिदायत – अमल पढ़ते वक्त अपने मतलूब का तसव्वुर  अपने दिल में रखे और भूल कर भी किसी नाजायज काम के लिए इस अमल को न करें वरना बड़ा नुकसान उठाना पड़ेगा ….

 

अवाम का दिल जीतना

कई बार महसूस करते है कि अवाम हमसे खींची-खींची रहती है । हमारे मामलात पर तवज्जुह नहीं देती है , न इज़्ज़त करती है हिकारत की नजर से देखती है जबकि आप किसी का न दिल दुखाते है, न किसी को नुकसान पहुचाते है सबकी भलाई चाहते  है इसके बावजूद भी अवाम आपके बारे में अच्छी राय नहीं रखती तो ऐसी हालत में चाहिए कि वह यहाँ दिया गया अमल करें । इस अमल में अल्लाह का एक सिफ़ाती नाम पढ़ा जाता है । इसका बहुत फैज हासिल होता है …..

                           

 खैरो बरकत के लिये

अगर घर में बेबरकती हो रही हो , काफी कमाने के बाद भी बरकत न रहती हों , घर में पैसा आने से पहले ही खर्च के हालात पैदा हो जाते हो तो इस विर्द को अपनी जिंदगी का मालूम बना लें अल्लाह के करम से घर में खैरो बरकत होने लगेगी …

 

 रूहानी पढ़ा हुआ नगीना

रूहानी पढ़े हुए नगीने से अपनी जिंदगी को पुरसुकून और खुशहाल बनायें

    यूं तो अल्लाह तआला अपनी रहमत से इंसान को उसकी मेहनत और उसके दिमागी हुनर पर उसे खुशहाली अता करता है मगर ये भी हकीकत है और ये बात अब साइंस से भी साबित हो चुकी है कि कुदरती खजाने से मिलने वाले पत्थर के नगीने भी अल्लाह के हुक्म के मुताबिक इंसानी जिंदगी पर असर अंदाज़ होते है । किसी भी पत्थर की ये तासीर उसमें पाई जाने वाली खुदादाद रूहानी क़ुव्व्वत का असर होता है ।   

अब ये बात बहुत से तजुर्बात से साबित हो चुकी है कि अगर किसी नगीने को एक खास रूहानी अमल के जरिये पढ़ दिया जायें तो उसकी रूहानी ताकत और तासीर आम नगीने से कई गुना बढ़ जाती है । इस तरह उस नगीने में पाई जाने वाली रूहानी ताकत बेदार हो जाती है जिसकी वजह से वह नगीने इंसानी जिंदगी पर आम नगीने से कहीं ज्यादा असर डालने लगता है ।

इंसानी जिंदगी पर असर डालने वाला एक सादा सा जवाहर है “अकीक  ” । वैसे तो ये सादा सा आम पत्थर है मगर एक खास रूहानी अमल के जरिये पढ़ने के बाद यह जवाहर गैर मारूफ तरीके से असर दिखाने लगता है ।

 रूहानी पढ़ाई के बाद अगर इस नगीने को बताए गए तरीके से  काम में लाया जायें तो इससे इंसान की ‘ कुव्वत मल्किया ‘ में इज़ाफ़ा होता है। तनाव, चिड़चिड़ापन और गुस्सा कम होता है । खून का दबाव दुरुस्त होता है । मन का खौफ दूर होकर अच्छे ख्यालात पैदा होने लगते है । दिल व सीने की बीमारियों से निजात मिलती है । आलस और मायूसी में कमी आती है । जिस्म पर जहर का असर कम होता है। पेशाब की बीमारियों को दूर करता है । अवाम में तस्खीर और इज़्ज़त हासिल होती है ।

यही नहीं बल्कि इससे ऊपरी असर जैसे – जिन्न, भूत , प्रेत, जादू टोना , बुरी नजर वगैरा और मुस्तकबिल में होने वाले मुख्तलिफ किस्म के हादसों से भी हिफाजत रहती है । कारोबार, घर , दुकान, वगैरा में बरकत होने लगती है । जिंदगी का ठहराव दूर होकर तरक्की की बन्द राहे खुलने लगती है । बन्द दिमाग खुल कर काम करने लगता है, दिल और दिमाग में तरक्की के नये – नये ख्यालात पैदा होने लगता है जो फज्ले इलाही तरक्की का सबब बनते है ।

 अगर यह अकीक बच्चो को पहनाया जायें तो इससे उनका चिड़चिड़ापन दूर हो जाता है और वह बुरी नजर से महफूज रहते है । उनका खाब वगैरा में डरना – रोना भी खत्म हो जाता है ।

    इस पढ़े हुए अकीक को कारोबारी इदारो की तिजोरी, दफ्तर और घर वगैरा में बताये गए तरीके को अपनाने पर कारोबार में बढ़ोतरी व खुशहाली आने लगती है । इमारतों का तमीराति मुज़िर असर भी दूर हो जाता है कुल मिलाकर इंसानी जिंदगी के लिये यह  एक बहुत ही नायाब और कीमती खुदादाद तोहफा है ………